कवि नागराज भाई पाळ्या तीन तोता
उडग्या तो तीन दिन थम्यां कोनी रोता
दिलासो दियो जा’र,
तो बोल्या सिर हला’र,
भाई सा’ब, कठै मिलसी, अबै इसा श्रोता!