का’ल रात गीगलो हुयो जणा ‘सूंगा’ रै

नेता हुसी, जचगी सह, स्याणां रै’र गूंगा रै

सक रैयो नहीं कीं रै

क्यूं कै जामता ही बीं रै,

छोटी सी’क अेक खुर्सी, चिप्योड़ी ही ढूंगा रै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मोहन आलोक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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