इडी मोटी बही राखता, ‘श्री खुडालिया’

टिकता नहीं मुनीम, कई आया कई जा लिया

देखणो जे हुवंतो आंक,

परलै सिरै पर झांक,

दीखतो नहिं, जाणो पड़तो चाल’र गुडाळियां!

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मोहन आलोक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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