इडी मोटी बही राखता, ‘श्री खुडालिया’
टिकता नहीं मुनीम, कई आया कई जा लिया
देखणो जे हुवंतो आंक,
परलै सिरै पर झांक,
दीखतो नहिं, जाणो पड़तो चाल’र गुडाळियां!