कोळूमढ़ सूं आव, वचन सुण ने मो वाळा।
कारीयात सूं कमध, भीर आवे भालाळा।
वळमढ़ ध्रांगड़वास, हूंत सुण आवे हेलो।
कमध चढ़े काळवी, आव मो करण उवेलो।
चाचरै हूंत सावळ सुणे, ग्रहण भीड़ मेटण घणी।
काळवी चढ़े ऊपर करण, धांधलोत आवो धणी॥
भावार्थ :- हे पाबू! आप मेरी आवाज सुनते ही कोळू के मंदिर से आइए। हे भालाधारी! आप कारीयात नामक स्थान से आकर मेरी रक्षा करो। आप मेरी पुकार सुनते ही काळवी घोड़ी पर आरूढ़ होकर धांगड़वास के मंदिर से आकर मेरी रक्षा करो। हे धांधक के पुत्र, मेरे स्वामी! आप मेरी फरियाद सुनते ही काळवी आरूढ़ होकर मेरी रक्षा के लिए चाचरे नामक स्थान से आना तथा जकड़े हुए कष्टों से मुझे मुक्ति दिलाना।