ब्रह्मा अर ब्रहस्पति, बेद मों आगळ बांचै।

दसही भड़ द्रगपाल, सदा सेवा मुझ सांचै॥

किन्नर गंध्रब किता, संगीत उचारै।

नारद आवै नति, सदा मुझ कारज सारै॥

सुरराज सदा राखूं सरण, अप्प रहूं अति मान सूं।

झट खगां बीस बिसवा झळै, मिळै रांवण रांम सूं॥

स्रोत
  • पोथी : राम रंजाट ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : डॉ. उषाकंवर राठौड़ ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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