दूत बात सांभळि कोपे कंप्यो ते लक्ष्मण,

अेह बळ आव्यो कोण लेखवे नहिं हमने पण।

रावण मय मार्‌यो तेह थिये कुण अधिको,

वज्रजघते कोण कहे दूत ते छे को॥

दूत कहे रे सांभळो लव कुश नो मातुलो,

जगमा जेहनो नाम छे जाने नहिं केम वातुलो॥

स्रोत
  • पोथी : राजस्थान के जैन संत: व्यक्तित्व एवं कृतित्व ,
  • सिरजक : भट्टारक महीचन्द्र ,
  • संपादक : डॉ. कस्तूरीचंद कासलीवाल ,
  • प्रकाशक : गैंदीलाल शाह एडवोकेट, श्री दिगम्बर जैन अखिल क्षेत्र श्रीमहावीरजी, जयपुर