जैत राव चहुवाँन सकल विद्याजुत सोहै।

दाँन कृपाँन विधाँन अखिल भूपति मन मोहै॥

अमित थाट रजपूत वंस छत्तीस अमानो।

सूर बीर उद्दार बिरद बंदी जु बखानो॥

दिन प्रत्ति तेज बड्ढिय नृपति, सत्रु संक निसि दिन रहैं।

विस्सलह भूप अवतंस भुव, अरथिन् मिलि दारिद दहैं॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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