इक्क समय आखेट, राव खेलन वन आए।

सकल सुभट थट संग, बीर वानै जु बनाए॥

लखव इक्क बाराह, बाजि पिच्छै नृप दिन्निव।

रहे संग तैं दूरि, सथ्थ बिन राव सु किन्निव॥

वन बिषम बंक भूधर बिरह, सुथल पदम भव तप करत।

मृग त्यागि भागि मिल्ले सुऋषि, बंदि चरण सवा धरत॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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