आज दुरगति नियै आज है पाइ भू अंजप।

आज गुडळि गयण अउब अण झंप तरणि तप।

असपति आज सरोस आज मुरधरा झमंको।

आज घण संग्राम सीस तन ग्रीध चमंको।

पतसाह राह तां परि भवण, त्रिपति गंग रै नंदयण।

भूअ मंडळि इसी वरतंति भति माल तूझ होअतै मरण॥

स्रोत
  • पोथी : डूंगरसी रतनु ग्रंथावली ,
  • सिरजक : डूंगरसी रतनू ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी ,
  • संस्करण : प्रथम
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