सुणियौ ‘साहिजिहान’, येमि ‘सूजा साहि’ आया।

पट्टण हदा तौड़ि, पाट द्रहबट्ट लुटाया॥

असी सहस असवार, पार पैदल कुण पावै।

मेक सहस मातंग, अरि गढ मूळ ऊचावै॥

गज नाळि गजा सुत्रनाळि गणि, तोप जमूर जगळा तई।

सीसाण बाण सौराण सजि, दीयण विधी फतै दई॥

स्रोत
  • पोथी : बिन्है रासौ ,
  • सिरजक : महेसदास राव ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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