ढाल गजा ढाहसी, आजि बेगागळ येहौ।

लालबे बांहा नाम, तिकौ उचिस्रवा तेहौ॥

लखि धूप खेवज, पमंग येहौ पाखरियौ।

जुधि बेळा जाणिजै, अरस हूता ऊतरियौ॥

यम आय दरोगै अग्गळै, कही अरज जोड़ै करां।

कासां अन बारीगरां, हुई तैयारी हैमरां॥

समर चढै ‘साईदास’ आयो पाणै। ‘जसा’ रौ यसो वोपियौ जमराणै॥

जकौ आजि साहां बिन्है हूत जूटै। तिकौ पाव आडिग सो सीस तूटै॥

‘कुसळसिंघ’ रणधीग चढियौ करारौ। सदा भाखरा पौतरां माहि सूरौ॥

चढै भाण ‘इंद्रभाण’ आयौ भुजाळौ। राजा गौड़ री पाखती रख्खवाळौ॥

‘किसनदास’ चढियौ असौ सूर कोपै। अणी बींद पातळौत रै बस ओपै॥

चढै गौड़ मारौठ रा घणा गाढा। ठिकाणै ठिकाणै रहै जोध ठाढा॥

नरानाथ ‘नरहर’ इसौ कहर निरखे। पुणै घात पाती अग नी काढि परखे॥

बळै सीह ‘नरसीह’ चढियौ बहस्सै। कसै बाग केकांण केवाण कस्सै॥

बळै चढै ‘जगभाण’ दइवाण बांकौ। यळा ऊपरा राखबा बात आकौ॥

कहर चढै कूरम्भ मांझी ‘किसोरौ’। तकौ ताणिया सीस आमैरि तोरौ॥

हबे चढियौ विप्र ‘श्रोमणि’ दुबाहौ। बड़ौ ‘खेम’ जोसी तणौ खग्ग बाहौ॥

बिढैबा जकौ नहीं आणै बिचार। द्विज ‘सोमदत्त’ चढै सत्त सार॥

बळै ‘तेजसी’ भाट चढियौ विकट्टे। घणा भाजणौ गांजणौ घाघरट्टे॥

‘हरज्जी’ जिय बध दूजौ हठीह। सिंधू बाजिया पाधरौ तकौ सीह॥

बळै दरोगौ रसोई तणौ बारी। कही नाम ‘मेघौ’ घणौ यत्तबारी॥

‘नरो’ चढै नाई खरो ही नजीकी। जकौ जाणतौ बात आघात जीकी॥

बरणिया सरीकी मरण रा यत्ता आछा। पुळै आवसी और ते घणां पाछा॥

सूरा जकै पंचसै लार सज्जै। बीरारस्स रौ तीसरौ नाद बज्जै॥

चमू सामता येमि हल्ली सुचल्ली। भोळानाथ री जाणि जम्भाति भल्ली॥

सिलहदारिया सेल सूर पाणे। पुणै सूर झाले यता सूळपाणे॥

बड़े तोबची मोहरै दोय खासा। पछै पाखती ओर खवास पासा॥

खड़े कौतिल मोहरै करै खूंदा। फबै रेसमी डौरि झिलमेस फूंदा॥

जिया सोवनी जीन नै तेसौ जगीसै। दूजा सूर जाणै तुरया पीठ दीसै॥

दियां सीस टोप सिफर बणै दौळा। दिपै हूंदादार ढिगे चमरं ढौळा॥

खड़े एक हूं एक भड़ खड़े आगा। बळै कह्यौ राजा खड़ौ जौड़ि बागा॥

धीरा खड़ौ हो रावतो धीर धारो। बड़ा ठाकुरे बात मोटी विचारो॥

जड़ौ मारुवा दुसारा बीचि जाडी। अबै मरण री घड़ी दो तीन आडी॥

चमूनाथ ‘अजमाल’ सामा चलाया। अबै आपरा मोरछा बीचि आया॥

बड़ौ मोरछौ हरवल्ल वामी। नरानाथ ऊभौ पाराथ नामी॥

अबरी बर ‘अजमाल’, चढै नरइंद संचावौ।

तीन बांधि तरवारि, दोय सुलिताणां दावौ॥

लालबे बाहां नाम, तुरी चढिया रिण तावै।

लख घाव लागिया, बळै लख घाव बहावै॥

सिरदार सूर चढिया सकौ, सार कोट बधि सिली।

तिण बार सीह अरजण तणी, मूंछ जाय भौंहां मिळी॥

स्रोत
  • पोथी : बिन्है रासौ ,
  • सिरजक : महेसदास राव ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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