चउंड राउ दिय ऊघूळ चाउ, राउत आपहे आप राउ।

सोहिया प्रवाड़ा सिंङ्घ सीस, जम्बुअह दीप जग्गी जगीस॥

भावार्थ :- राव चूँडा अत्यंत उदार हृदय वाले थे। वह स्वयं ही रावत और स्वयं ही राव थे। उन्होंने सिंह के शिकार का जो सुयश अर्जित किया, उससे समग्र जंबूद्वीप में उन्हें जानने की इच्छा जागृत हुई।

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