थिर ऊतर ‘साहिदारा’ स थप्पै।
यळा पूरब साहि ‘सूजा’ स अप्पै॥
जरा दिखिण साहि ‘अवरग’ जाणौ।
बळ पछिम साहि ‘मुरियाद’ बखाणौ॥
चहू देस अच्चाळ च्यारौ चगत्ता।
करै च्यारहु येमि चौ बेद कथ्था॥
दिली ‘साहिजिंहान’ बैठौ दुबाह।
येक पाय सेवै जीह दोय राह॥
जीयप्पउ जहमत्ति जांणी जगत्त।
खाली हुवौ तखत्त नै आतपत्त॥
मही मडळं हूहळ कूक माचै।
वळा च्यारि वाका दहाका स बाचै॥