सिरज्या जिण्य सहंस अठार आलंम, उरवा उतिम सुर-असुरै।
पैकंबर पीर मळाय क महतर, कइ लाख कंवार करै।
भगतान विसति दुसमंणां दोरै, अपरंपर आयसी अरै।
ताय धंणीय तेजस कव साचवतां, कर जोड़े सलांम करै॥