रचै सिल्लह येम जोधा ‘मुरारी’।
यळा राड़ि जाती स खाटे उधारी॥
सनांन जप ध्यान कीधा स सूर।
हियं जुद्ध काजै स बाधै हिलूरं॥
भड़ा नाथ भाराथ पाराथ भेखे।
भुजा भीम अंगद पांयै स पेखे॥
दरजोधन माण जेहा दुबाहं।
रिम सूर चदं ग्रहै जेमि राहं॥
भ्रकुट दिय टोप सन्नाह सज्जे।
बळै बांधिया दसतानां सु बज्जे॥
रागा बांधिया राग मौजा सुं मंडै।
बिन्है आजि सुरताण सेना बिहड़ै॥
कम्मरे बांधिया बांदि बूंदी कटारी।
सिरोही बळै तेग बधै संवारी॥
तुरस अलीबंद बधै स चावं।
बणै रूप जोगिंद्र राड़ राव॥
बळै तौन बधै सिलीमुख्ख सज्जे।
धनख बळै धारिया वाम कज्जे॥
भड़ां आपरा कहै भारी ‘मुरारी’।
ततौ हुई सेना तयारी तयारी॥
खत्री माल ‘अजमाल’ रौ घणौ खायो।
लड़ौ आजि मोटौ परबे सुं पायो॥
परब येरसो फेर नौ कदे पावो।
अड़ौ आजि सोहड़ो भड़ो कामि आवो॥
चढै गौड़ राजा तिय साथि चढ्ढो।
विढो सेनि साहा बळै, गात बढ्ढो॥