प्रथी पयांळ सपत सिरज्या, इल अकास थापीया थिरूं।

खळकी जिण्य खळक खुदायबंद खाळिक, जळ थळ महीयळ मेर गीरूं।

सायर जळ सुजळ सुरनर सीसीहर, जळ तारायंण त्रिलोक सरै।

ताय धंणीय तेजस कव साचवतां, कर जोड़े सलांम करै॥

स्रोत
  • पोथी : भारतीय साहित्य रा निरमाता : तेजोजी चारण ,
  • सिरजक : तेजोजी चारण ,
  • संपादक : कृष्णलाल बिश्नोई ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
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