पाबू पसाउ चंपियउ पाइ, खइंगरू कुळाछा छोहि खाइ।

धर सुछळि उडावण धार धूप, रामडउ चडिय नवसहस रूप॥

स्रोत
  • पोथी : छंद राउ जइतसी रउ ,
  • सिरजक : बीठू सूजा ,
  • संपादक : मूलचंद प्राणेश ,
  • प्रकाशक : भारतीय विद्या मंदिर शोध प्रतिष्ठान, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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