छंद रेणकी
सर सर पर सधर अमर तर अनसर, करकर वरधर मेल करे।
हरिहर सुर अवर अछर अति मनहर, भर भर अति उर हरख भरै
निरखत नर प्रवर प्रवरगण निरझर, निकट मुकुट सिर सवर नमै।
घण रव पर फरर धरर पद घुघर रंगभर सुंदर श्याम रमै॥
झणणणणण झणण खणण पद झांझर गोम घणा गणणण गयणै।
तणणण बज तंत ठणण टंकारव, रणणण सुर धणणण रयणै।
त्रह त्रह अति त्रणण धणण बज त्रासा, भ्रमण भमर वत रमण भ्रमै।
घण रव पर फरर धरर पद घुघर, रंगभर सुंदर श्याम रमै॥
झट पट पर उलट पलट नटवत झट, लट पट कट घट निपट ललै।
कोकट अति उकट गति धुन कट, मन डरमट लट लपट मलै।
जमुना तट प्रगट अमट अट रट जूट, सूर पट खेखट तेण समै।
घण रव पर फरर धरर पद घुघर, रंगभर सुंदर श्याम रमै॥
धमंधम अति धमक ठमत पद घूमर, धमधम फळ सम होत धरा।
भ्रम भ्रम वत विषय परिश्रम व्रत भ्रम खमखम दम अहि विडुम खरा।
गम गति अति अगम निगम न लहत गम, नटवत रमझम गम मन में।
घण रव पर फरर धरर पद घुघर, रंगभर सुंदर श्याम रमै॥
गत गत पर ऊगत तूगत नृत प्रियगत, रत उनमत चित वधत रति।
तत पर घ्रत नचत उचत मुख थैथत, आब्रत अत उत भ्रमत अति।
धिधितत गत वजत मृदंग सुर उपजत, कृत भ्रत नर तम अतंत क्रमै।
घण रव पर फरर धरर पद घुघर, रंगभर सुंदर श्याम रमै॥
ढल ढल रंग प्रगल अढल जन पर झल, झल अल कल तेज झरे।
खलखल भुज चूड़ चपल अति खमकत, कान कतोहल प्रबल करै।
वलवल गल हस्त तु मल चल चितवल, जुगल जुगल प्रति रंग भरै।
घण रव पर फरर धरर पद घुघर, रंगभर सुंदर श्याम रमै॥
सरवस वस मोह दरस सुरथित शशि, अरस परस त्रस चरस अति।
कसकस पट हुलस विलस चित आकृष, रस बस खुश हस वरस रति।
टरस नव रस सरस भयो ब्रह्मानंद, अनरस मनस तरस अथमै।
घण रव पर फरर धरर पद घुघर, रंगभर सुंदर श्याम रमै॥
दूहा
अेक निशि ससी उदित अति, हुय मन अधिक हुलास।
जमुना तट व्रज नार जुत, रच्यो मनोहर रास॥