खड़की गढ़ धोखळे, गोळकूंडौ गाहट्टे।

खत्रि लियौ खेलणौ, झाड़ि खळ दळ खग झट्टै।

तोड़िचंदी तोड़ियौ, निहंग चढ़ियौ पड़ि नाळौ।

गढ़ विकराळौ ‘गजण’, रूक बळि लियौ रनाळौ।

आसेर सतारौ ऊझड़ै, धोम कोम अहि धूजियौ।

दळथंभ नांम असपति दियौ, पटां वधारां पूजियौ॥

स्रोत
  • पोथी : सूरजप्रकास भाग 2 ,
  • सिरजक : करणीदान कविया ,
  • संपादक : सीताराम लालस ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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