दणीयर नहीं दिन रैण नहीं सीसीहर, जत न जोग न वड पवंणौ।

वांणी तंन चेद भेद तन भाख्या, जांण न को आवागुंवंणौ।

काजी न कुरांण पुरांण न पिंडत, प्रजा न राजा न कौ परूं।

क्रतार क्रंम कायंम करंणीगर, हुंता तहीयां केम हरूं॥

स्रोत
  • पोथी : भारतीय साहित्य रा निरमाता : तेजोजी चारण ,
  • सिरजक : तेजोजी चारण ,
  • संपादक : कृष्णलाल बिश्नोई ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
जुड़्योड़ा विसै