सेठ बोल्यो नौकर नै, देख कुण पोळी पर आयो।

कुण्डी इत्ती जोर-जोर खड़खड़ाई है॥

पाछो आय नौकर क‌ह्यो कै बींका थारै मांय।

रिपिया बाकी है, आयो करणै उगाई है॥

पूछ्यो घबड़ाय सेठजी, कै कठै स्यूं है आयो।

देखणै में लागै किस्यो बात के बताई है।

नौकर खुलासा करी, इस्यो लागै देखणै में।

बींका पीसा चुपचाप देणै मै भलाई है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : जयकुमार रूसवा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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