‘अवरग’ साहस ऊससै।

केवाण दिल्ली सिर कसै॥

जमराण जेहा जग्गिया।

लख दळा मेळण लग्गिया॥

फुरमाण बळ बळ फट्टिया।

थिर थाट येहा थट्टिया॥

किरनाट बीजापुर कहै।

यळ गोळकुडा उल्लहै॥

दिखणीस दिखण देसरा।

नर मेळि नेस नेसरा॥

सामान कीधौ समर रौ।

चित चाव छत्र चमर रौ॥

भरि सोर बाण भराविया।

केइ लक्षि लक्षि कराविया॥

हथनाळि तोपां रत्थय।

सुत्रनाळि नाळि समथ्थय॥

जबूर तोपा जेतली।

यळ मधि भेळी येतली॥

गोळीय गोळा गंज्जियं।

भरि लोह सीसा भज्जिय॥

मसहद्द बळी मुलतानये।

केई कौटि मेळि कबानये॥

तीरां बीरा ते हुवा।

जे रिण सवारि गजे हुवा॥

सिरोहिय समसेरय।

ऊना जनब्बी वेरय॥

असल्ली असल्ली आणिये।

खग चाढि जे खुरसाणिये॥

जमदाढ जिंमा जम्भ री।

सार में सार सभरी॥

साबळा कीजै सातरा।

भूथाण भातिस भाति रा॥

चाठां बगतर चाढिजै।

केइ राग घूघी काढिजै॥

पाखरां अबरा दीजिये।

केकाण गज्जां कीजिये॥

वडफर अपारण बंधिये।

सुचिते अपारण सचिये॥

सरियाह ओप सुधारिजे।

धू काज सार उधारिजे॥

मनसूब बाधे ऊमरा।

खित मुगल हिंदू खूमरा॥

सह बधै आघ सिपाहिया।

अद्भुत मन ऊमाहिया॥

बोहो मोल चढियौ हैंमरा।

गिणजे समव्वड गैमरां॥

पीलाह मोल अपारये।

हद बीस तीस हजारये॥

यम साहि ‘औरग’ सज्जवे।

बीराण नौबति बज्जवे॥

स्रोत
  • पोथी : बिन्है रासौ ,
  • सिरजक : महेसदास राव ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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