सिरज्या जिण्य सहंस अठार आलंम, उरवा उतिम सुर-असुरै।

पैकंबर पीर मळाय महतर, कइ लाख कंवार करै।

भगतान विसति दुसमंणां दोरै, अपरंपर आयसी अरै।

ताय धंणीय तेजस कव साचवतां, कर जोड़े सलांम करै॥

स्रोत
  • पोथी : भारतीय साहित्य रा निरमाता : तेजोजी चारण ,
  • सिरजक : तेजोजी चारण ,
  • संपादक : कृष्णलाल बिश्नोई ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
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