आगइ अहर रस रत्त, अनइ अहर विलासीय।

आगइ लोयण लोइ, अनइ कज्जलिहिं कलासीय॥

आगइ थणहर थोर, अनइ हाराउलि भारीय।

आगइ काम गायम धारि, अनइ झंझरि झमकारीय॥

आगइ काम कीय कामिनी, अनइ वंस तन सि ऊजली।

पहुवच्छ-तणउ भमर रंगि रसि, इसी नारि सूदा मिली॥

स्रोत
  • पोथी : सदयवत्स वीर प्रबंध ,
  • सिरजक : भीम ,
  • संपादक : डॉ. मंजुलाल मजमुदार ,
  • प्रकाशक : सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
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