तिहां राजा नउ पुत्र हुंतउ, अहिकुंडल इण नामि।

तिण दिठी ते सुंदरी, अति सुंदरी अभिराम॥

अभिराम देखी रूप सुंदर, काम विह्वल ते थयउ।

दूतिका मुंकी छल करी नइ, महुल मांहि ले गयउ॥

सुख भोगवइ तिण साथि कुंयर, चोरां विच पड़्या मोर ए।

देखइं नहीं आपणी अस्त्री, मधुपिंगल करइ सोर ए॥

स्रोत
  • पोथी : सीताराम चौपाई ,
  • सिरजक : समयसुंदर ,
  • संपादक : अगरचंद नाहटा, भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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