तसु धूय रूपइ देवकुंवरि, नेसालइ भणिवा गई।
अति चतुर चउसठि कला सीखी, जोवन भर जुवती थई॥
प्रोहित नउ पणि पुत्र तिहां कणि, मधुपिंगल नामइ भणइ।
गुणगोष्ठि करतां नजरि धरतां, लपटाणा प्रेमइ घणइ॥