तसु धूय रूपइ देवकुंवरि, नेसालइ भणिवा गई।

अति चतुर चउसठि कला सीखी, जोवन भर जुवती थई॥

प्रोहित नउ पणि पुत्र तिहां कणि, मधुपिंगल नामइ भणइ।

गुणगोष्ठि करतां नजरि धरतां, लपटाणा प्रेमइ घणइ॥

स्रोत
  • पोथी : सीताराम चौपाई ,
  • सिरजक : समयसुंदर ,
  • संपादक : अगरचंद नाहटा, भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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