तिण वार त्रिया रतनेस तणी।

विधि साहस सोळ सिंगार वणी॥

पग हाथ मलूक पंकजयं।

गुणि छत्तिय गत्ति विन्है गजयं॥

कटि सिंघ नितंब जंघा कदली।

चित्त नित्त प्रवित्त मराल चली॥

तन रंभह खंभ कनंक तिसी।

ओपै सिरि नागेंद्र वेणि इसी॥

स्रोत
  • पोथी : वचनिका राठौड़ रतनसिंघजी महेशदासौत री ,
  • सिरजक : खिड़िया जग्गा ,
  • संपादक : काशीराम शर्मा, रघुवीरसिंह ,
  • प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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