नजरि नजरि बिहुं नी मिली, जाणि साकर सुं दूध।
मन मन सुं बिहुं नउ मिल्यउ, दूधपाणी जिम सूध॥
जिमि सुद्ध तिमि वलि जीव जीव सुं, मिल्यउ भारंड नी परिं।
कामी थकउ ऊपाड़ि तेह नइ, ले गयउ विद्रभापुरिं॥
काम भोग ना संयोग सगळा, सुक्ख भोगवतउ रहइ।
विद्या हुंती ते गई वीसरि, धन विना ते दुख सहइ॥