इम उच्छब तीज आरंभ किया, अब बीज चमंकत राह बिहूं।

झळ मंगळ ओरस मंगळ झोकत, मोर कौहोकत रात दिहूं॥

चलि वाय प्रचंड उडंड चहूं दिस, बादल जुत्थ अकाल भ्रमै।

बिसनेस सुजाव उछाव बधोतर, राव असी विध तीज रमै॥

रंग रंग घटा उतराध अटा, चढि च्यार तरफ छटा चमकै।

अति मेघ आवाज भयंकर ओपम, धाम धराधर भू धमकै॥

दिन राति भेद अभेद दरस्सत, संतज भूलत संधि समे।

बिजनेस सुभाव उछाव बधोतर, राव असी विध तीज रमै॥

असमान गवन्न पवन्न उडावत, मोर बढावत सोर मही।

खट खोट तजै पतिप्रोषितका, सुणि लौटत भू प्रमुदा जसही॥

अति नीर प्रवाह चलंत उतावळ, गाजत खोह जिता गिर में।

बिसनेस सुजाव उछाव बधोतर, राव असि विध तीज रमै॥

नदि डाबर नीर निवांण जिता, मिळि एक इता सर होत मही।

जल-व्यंब दरस्सत बारि बरस्सत, एक सरस्सत भैक अही॥

बोहो दादुर सोर झिलीगण बोलत, छौलत ब्रहणि डार छमै।

बिसनेस सुजाव उछाव बधोतर, राव असि विध तीज रमै॥

अंधियार निसा वणि सावण आगम, मंद समागम राह मिळै।

जळ लूहर छोळ झकोळ जमीं पर, पोत गमी पर जांणि प्रळै॥

गहरात घटा अहरात अखंडित, खंडित भू थहरात खमै।

बिसनेस सुजाव उछाव बधोतर, राव असि विध तीज रमै॥

स्रोत
  • पोथी : राम रंजाट ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : डॉ. उषाकंवर राठौड़ ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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