साह कहै ‘अवरंग’ सपाणौ।
काळजवन जेहौ कोपाणौ॥
कितौ गौड माडौ गढ केतौ।
अम्हां हूत कहियो बळ येतौ॥
आजि दुरग द्रहबट्ट उडाडौ।
प्रात सूध जड़ हूता पाड़ौ॥
करै कोप साहि हला कीधा।
दावा भड़ा सूं अग्या दीधा॥
सुलिताण ‘महमूद’ सिंघाळौ।
लाख फौज लीधां लकाळौ॥
‘खान निजाबति’ हरवल खड़िया।
येण रूप आय माडौ अड़िया॥
गढ़े राजा ‘सिवपती’ गाढौ।
ठौर दिया त्रामागळा ठाढौ॥
दरवाजा मडिया आय दावा।
चावा नृपति भडा अनचावा॥
‘पौहकरदास’ जिसा बध पासै।
तिण री धाक खळा उर त्रासै॥
मार करै हथनाळि कमाणां।
वळे बन्दूक बाण बरसाणां॥
दळा असुर आय लग्गा दौळां।
गौड़ तणां छूटै यम गौळा॥
तचियौ साह दुरग न तूटै।
जिकौ गौड़ आरौड स जूटै॥
कहै साह हब कूच स कीजै।
लै दिल्ली सिर माडौ लीजै॥
‘सिवपति’ बात रही जग सारै।
चंद सूर भी नाम उच्चारै॥
खड़िया साह बिन्है खड़ि खाथा।
सकल सेन पड़िया खड़ि साथा॥
जग सूर अहि नर कौतिग जोसी।
हब भारत ऊजेणि स होसी॥