गुरु अज्ञा मेटीजै नाहिं,

भावै देह पात ह्वै जाही।

होय गुरमुखी जग में रहै,

सिर पर सीत ऊस्न सब सहै॥

स्रोत
  • पोथी : दया बोध ,
  • सिरजक : दयाबाई ,
  • प्रकाशक : बेलडियर प्रेस , प्रयाग