राज कहइ बारहटा बली, कीरति-लाछि मांहि कुण भली।
लाछइं गरथ घणउ आविसइ, कीरति देसि विदेसइ हुस्यइ॥
‘मोल्हउ’ कहइ मोकल्यउ सुरताणि, कहइ सुं सुणइ हमीरदे राण।
‘देवलदे’ कुंवरी परणावि, ‘धारू’ ‘वारू’ साथि अलावि॥
हाथी घण बे मांगइ मीर, तुम्हनइ निहाल करइ हमीर।
अधिका दे ‘मांडव’ ‘ऊजेणि’, सवालाख संभरि तउ केड़ि॥