रटै हिंदवां नाम सिव रांम रांम। दळां दख्खि बेहुवै बाजै दमाम॥

अला अला ऊचार कीधौ अभंगा। रवद्दा मरद्दां मुखे रब्ब रंगा॥

असां बाण बेऊ दळां तणा ऊडै। वबे भाण धूवाण मंझ्झेस बूडै॥

पलीता जगे नाळि सुत्रनाळि पग्गै। लगे पाखरां ऊपरै ऊक लग्गै॥

दगे मग्ग पक्षी आकास दाह। हुवे येमि आकास खड़े उलाह॥

अई तोप छूटै बडी व्है अवाज। गोई घमक्कै मेघ गयणांग गाज॥

अनं गज खोटा खौली अधारी। भणौ आदुवा लंगरां खीलि भारी॥

बजै राग सिंधूव जोधा बहस्सै। तटा कायरा सायरां ते तरस्सै॥

छित गीध पखी (स) गयणांग छाये। अनै अच्छरी बैठी बीमाण आये॥

पड़ै गोळियां मार गोळां प्रहारं। तुटै बाण असमांण हूं जाणि तारं॥

तीरा मार माची सही दुतरफ्फां। फुटै कट्टि छाती मौरा फरक्कां॥

धमधम सेला बहै व्है धमका। चव धारवारा पारा चमका॥

सेला बांहि ऊपाड़ता तेवि सूरा। पूरा जोध वेहरी गाते पूरा॥

सेला घाव हूं स्रौण री धार छूटै। फव्वारा बांध मद्धै ऊपटै॥

खापां छेक कीधी किता जोध खग्ग। मिलै गूदरी जाणि बाजार मग्ग॥

तुरक्कां कढीस तेग मूठी मेल्है। खेलै पूर ते रौज दाहाज खेल्है॥

मुणै भीड़ भाराथ मत्तै मच्ची। भड़ां ढाल खडक्कै पड़ी आणि पच्ची॥

झिलै सूर सामंत बाहै झटक्का। घड़ा ढग कुढ़ग रा लै घटक्का॥

गजा तणा कुंभाथळा सेल लग्गै। बळै धार हूं धार डंकार बग्गै॥

कड़ी झड़ै जरद्दा तणी जोध कट्टै। झटक्का केइ ढाल हूता उझट्टै॥

बाहै येमि जमदाढ जोधा बिरत्ता। हुवै वार-हूपार हाथा सहत्ता॥

बहै येमि गुरज्जा फरस्यां गुपत्ति। ढहैं जोध असवार जाये धरत्ति॥

वहै येमि चूगा चपेटा बाहं। गजा टूक पड़िया मचै गज्जगाहं॥

बहै हूल धूपा जियानं बुगद्दा। गमा-गम माचै ही मार गद्दा॥

नचे नारदं बीर बैताळ नच्चै। महाखेत ऊजेणि भाराथ मच्चै॥

झड़ै सार हूं सार अणपार झड़िया। प्रथम पांच सै खेत राठौड़ पड़िया॥

खरी बार जदि कायरां हुई खाटी। भड़ै तीन सै पड़ै संग्राम भाटी॥

पड़ै मोरछा ऊपरां भार पूरा। सिरदार रिणराव लड़ै सूरा॥

‘गाजिसाहिरौ’ येमि ‘जसराज’ आयो। धके ‘साहिमुराद’ ‘अवरंग’ धायो॥

दहू अणी जुदी दहू साहिजादा। बहैं बाण वे लाख माचै बादा॥

हल्ला करै सुरताण बे चढै हाथी। सूर सैद पाठान मुगलाण साथी॥

उरां करै ‘जसराज’ हल्ला करारौ। मुणै ग्रहौ साहि सेना सधारौ॥

चमरे ढुळ ताव साम्हा चलाया। अनै ऊरड़ै बेऊ साहि आया॥

प्रळै कार रा जाणि सामुद्र पूरा। हूवै सेनि गरगाफ मांझे हिलूरां॥

हुवै हाथिया हूत चवदत हाथी। पड़ै चाचरा फुट्टि दाता पराथी॥

लड़ै येक भग्गै यक लार लग्गै। अड़ै बज्र हूं जाय मैनाक अग्गै॥

कटै केइ भरसूड़ि मारै चिकार। पड़ै पीलवान धजा अपार॥

गजे बाण गोळा आराबा गज्जे। भद्र-जातिया किते मद्द भज्जे॥

महा जोध जोधा मिळै माचि मार। धड़ा बेहड़ां तेहड़ा तूटि धार॥

धरा बासता धूवळा नाद ढक्के। झिलै झिल्लरी देवद्वारे झणके॥

पड़ै जूजुवा टूक यूं हाथ पांव। बहै श्रोणितं नाळ खाळ बहाव॥

पड़ै सीस रुंड नचै रुंड प्रेत। खिलै जुग्गनी खप्र लै मंझे खेत॥

पड़ै लंक हूं टूटि जोधा अनंत। कलेज बूक बिसथरी अंत॥

पड़ै फेफर गूद नै मेद फूटै। तिन ऊपरा गिझ्झणी झूंड तूटै॥

घटा घाव लग्गा घूमै घुरक्कै। फटा सीस फूटा केई फरक्कै॥

उड़ी खोपरी मझ्झि भेजो येखि। दहेड़ी जाणै ढाकणी खोलि देखी॥

अनै छातियां घाव लागं कटारी। बणै राज आवास जाणै बारी॥

सूरा पड़ै ऊठै लोह साहैं। बड़ा मैंगळा रिणगळा सीस बाहैं॥

पड़ै हैमरां पाखरां तूटि पासै। निजोड़ै पगां फींच ते केई नासै॥

अबै पड़ै नाहीं कमंध पांव आधा। भड़ा राचतां कायरां धीर भागा॥

अबै कामि आया तिया नाम आखूं। भड़ै जोधा भागा जियां नाम भाखूं॥

ठिकाणे ठिकाणे रहे जुद्ध ठाढा। गाढ़ा पांव रोपै अनै आप गाढ़ा॥

स्रोत
  • पोथी : बिन्है रासौ ,
  • सिरजक : महेसदास राव ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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