कछे काछ जोधार मेवास वाछं। सरूप मनौ मल्ल तै भल्ल साछ॥
बिहूं बाहुवै दंड परचंड वीर। मनौ भीम आकास सूवन सरीरं॥
द्रग राजत तेज तै सूर वार। अरी फौज फारांन तै अधियारं॥
यह भाय देखै यते चख्खि भीन। मनौ नवौ नाथांन पाराथ वीन॥
करै काछ पहरै उभै पाय जाम। यकं पट्ट दुतियं म्रगछाळ नाम॥
जड़ै राग भूजा अड़ै आसमान। जड़ै पाय मौजा सचौजा जवानं॥
विपद हरै स्वेदक बाय बीर। वधै छोह पंचाळिका जांनि चीर॥
जरद्द तस ऊपर बांधि जेहा। तस्समा त्रणै ताणि जूवाणि तेहा॥
दस्सता वळै बाधिया दस्सतानां। बहै आजि फौजा गजा तणा बानां॥
धरै टोप तै सीस ये वोप पूगै। अरक्क जिका ऊदिया सीस ऊगै॥
वधै गाढ में वाढ जमदाढ गाढ। बहै खाबळं डाडरा आणि बाढं॥
असै खड़ग बधै अंगजै अगंजै। गुमर जेणि दरगै ‘अमर’ राव भजै॥
बळै बाधि भूथाण में भरै बाणां। करां झालि गांजीय जेही कबांणां॥
अलीबंद बांमी भुजा भल्लि धारै। प्रथीनाथ कीरत्ति काजै पवारै॥
पुणै छंद येतौ भुजंगीप्रियातं। छत्री बस खटतीस ‘अजमाल’ छातं॥