करैं बीर लीला सुकीली बिधाँनं।
धरैं बाँन कम्माँन संधाँन पाँनं॥
लखे जीव जेते सु केते जिहाँनं।
भ्रमै जंत्र तंत्रं सु पावै न जाँनं॥