मिळै संभरी नाथ हाडा अमान। गरू गाहरे मल्ल पूरै गुमांन॥
जिनै बस धारै बिरुद्दं उजारै। बिरद्द जित्तनै सुरक्षा पगारै॥
अरी राय तारां मंयंक सतुल्लं। लुभीराय माथै गजां अक सुल्लं॥
बळाबंध रै पातिसाह बखान। चिर राज बूंदी गढ़ चाहुवान॥
दळे राय बीजापुर साहि दड़ा। जग हेम नग्ग लिये गोळकुड़ा॥
गढं लिय सो दौलताबाद गाढै। ठंभै और दूजै गढं कौन ठाढ़ै॥
लियं राय नाग गढ वगलाना। टोरे बिंद रोहे तुटै तिलंगांना॥
गुढी भांय ज्यौं राय गढ उडाये। लरै राय दक्षिन ढिल्ली सुं लाये॥
खिचीखंड ज्यौ राय खप्पाय खग्गं। मिळै केइ मारै परै केइ पग्ग।
धरै उत्तरं राय खग्गं धपाये। खळं मूगळं कज्जल बाज खाये॥
मरोरत लख्ख दुवै राह नामी। कहे भारथ कथ्थ कथ्था कहानी॥
पुणीजै कहालौं ‘सता’ के पवारे। तित अमर मद्धि ऊदोत तारे॥