किते जीव संमूह देखंत भज्जैं।

मृगं ब्याध्र चीते रिछं जत्र गज्जैं॥

कहूँ कौलपुंजं कहूँ लीलगाहं।

कहूं चीतलं पांडुलं ब्याध्र नाहं॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
जुड़्योड़ा विसै