कहूं भिल्ल बंके बसैं ताय्स्थाँनं।
भखैं सिंह स्यारं ससास्रोन पाँनं॥
करै सिंह गुंजार भारी भयाँनं।
सुने प्राँनहारी डरैं जीव हाँनं॥