ठावा कहाणीकार।
भूरी
नैणां खुट्यो नीर
हार्योड़ी जिनगानी
हिरणी
होम करतां हाथ...
बैजनाथ पंवार सूं दुर्गेश री बंतळ
आपणौ खास आदमी