हिन्दू धर्म में द्वादश ज्योतिर्लिंग की पौराणिक मान्यता है। इन्हीं में से एक बारहवां ज्योतिर्लिंग शिवाड़ (शिवालय) में स्थित है। यह राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में ईसरदा गांव के 3 किलोमीटर उत्तर में है। इस द्वादस ज्योतिर्लिंग की प्रसिद्धि घुश्मेश्वर अर्थात् घुश्माम-ईश्वर घुश्मेश्वर के रूप में है। इसके अलावा घुश्मेश्वर और घृसृयेश्वर आदि नाम भी कुछ ग्रंथों में मिलते हैं। शिव पुराण में घुश्म के द्वारा मांगे गये वरदान के अनुसार इस ज्योतिर्लिंग का नाम घुश्मेश या घुश्मेश्वर ही होना चाहिए जो आदिकाल से लोकप्रचलित है।

 

लोकमान्यता है कि भगवान आशुतोष ने घुश्म को यह भी वरदान दिया था कि यह जलाशय शिव का आलय हो जाने से तीनों लोकों में शिवालय के नाम से प्रसिद्ध होगा। वस्तुत: शिवाड़ आज से लगभग पांच सौ वर्षों पहले शिवालय के नाम से ही जाना जाता था। घुश्मेश्वर महादेव के ठीक उत्तर दिशा में शिवालय नामक सरोवर आज भी विद्यमान है। इस सरोवर का जल कई गुणों से युक्त और गंगाजल के समान पवित्र माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु इस जल को पूजन कार्य में काम में लेने के लिए कलश में भरकर ले जाते हैं। शिवाड़ ज्योतिर्लिंग का भगवान शिव में आस्था रखने वाले लोगों के लिए खास महत्व है।

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