राजस्थान में गेंद को ‘दड़ी’ कहा जाता है। यह खेल पुराने कपड़ों से बनी गेंद से खेला जाता है। मारदड़ी के खेल में इसके अलावा अन्य किसी संसाधन की जरूरत नहीं पड़ती। यह बच्चों और किशोरवय बालकों में काफी लोकप्रिय है। खेल की शुरूआत में सबसे पहले खिलाड़ी एकत्र होते हैं और गेंद को आकाश में उछाल देते हैं। आकाश से गिरते समय गेंद को लपकने वाला खिलाड़ी दूसरे को इसी ‘दड़ी’ से पूरी ताकत के साथ मारता है। इसके बाद गेंद हाथ में लेकर एक-दूसरे को मारने का क्रम चलता रहता है।

गेंद की मार से बचने के लिए खिलाड़ी इधर-उधर दौड़ते हैं और खुद को झुकाते-उछलते रहते हैं।
मारदड़ी के खेल में समय-सीमा नहीं होती है। यह खेल खिलाड़ियों के भाग-भागकर गेंद की मार से बचकर थकने तक चलता रहता है। मारदड़ी के खेल से अच्छा व्यायाम होता है।

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