#Anjas #AnjasMahotsav राजस्थानी साहित्य में भगती काल घणो महताऊ है। आखै राजस्थान में ओ भगती आन्दोलन आपणी भासा अर साहित्य री देन है भगती आन्दोलन राजस्थान रै हर अेक गांव नगर रै अणपढ़ लोगां में फैल्यो, इण आन्दोलन रा सूत्रधार संत अर भगत हा जकां में ज्यादातर कम भण्या-लिख्या या अण भणेड़ा लोग हा पण उणारो जिन्दगी रो अनुभव घणो गैहरो हो अर बै आम मिनख सूं जुडे़डा हा। मध्यकालीन संत परम्परा में संतां जिण वाणीयां भजनां री रचना करी उण नै निरगुण काव्य कैयो जावै इण बखत अनेकूं वाणी, भजन, दोहा, गीत याद रचिज्या बै लोक में आज भी प्रचलित है - इण भांत रो अेक भजन ‘चदरिया झीनी रै’ जिण नै ख्यातनांव कलाकार ‘मीर मुखत्यार’ जी आपरी आवाज दिन्ही है, सुणो ओ मीठो भजन "The Bhakti period holds immense significance in Rajasthani literature. It was a movement that penetrated every corner of Rajasthan, reaching even the most illiterate in villages and cities. Led by saints and devotees, many of whom were uneducated but deeply experienced in life, this movement gave rise to a rich tradition of Nirguna Kavya. Today, the songs and hymns composed during this era continue to resonate, exemplified by the timeless bhajan 'Chadariya Jhini Re Jhini' beautifully sung by the renowned artist Mir Mukhtiyar. Listen to this soulful hymn - Facebook: https://www.facebook.com/anjasrajasthani Instagram: https://www.instagram.com/anjasrajasthani/ Twitter: https://twitter.com/anjasrajasthani Literature Website: https://anjas.org/ Festival Website: https://anjasmahotsav.org/ ___________________________________________________________________________________अंजस कांई? अंजस राजस्थान री कला, साहित्य अर संस्कृति रो कोस है जिणमें सामिल है— कविता, कथा, कहाणी, बातां, ख्यातां अर लोक रो फूटरापौ। आ खेचळ रेख्ता फाउंडेशन कीन्ही है। अंजस रा अंग अबार इण खेचळ रा कैई न्यारा-न्यारा अंग है: जूनौ कोस: 13वीं सदी सूं ले’र 19वीं सदी रै लिखित साहित्य रो कोस। नूवौ कोस: सन् 1900 सूं आज तांई री लिख्योड़ै साहित्य रो कोस। वाचिक परंपरावां रो कोस जिण मांय सामिल रैसी लोक कथा, लोक गीत, औखाणा, संस्मरण इत्याद। अंजस महोत्सव: राजस्थानी भासा अर साहित्य रो वार्षिकोत्सव। भविख री बाट अंजस राजस्थानी भासा रो सगळा सूं लूंठो कोस बण’र त्यार होवैला अेड़ी आसा है। ओ कोस राजस्थानी पाठक वर्ग नै पूरै रूप सूं बिन्या कोई पैसां रै सब जिग्यां उपलब्ध रैवैला। आ खेचळ कितरी सारथक होवै इण बात री साख तो राजस्थानी रो आखौ पाठक वर्ग तै करेला, पण आपरी सिमरधता रै साथै जारी राजस्थानी रो पैलो उपक्रम है।
राजस्थान मांय लोकगीत आपरी महताऊ अर ठावी ठौड़ राखै, लोकगीतां री रचना लोक में प्रचलित हुवण वास्तै ही करीजी है। राजस्थान रा लोकगीत ई'ज आपणै परदेस नै सैंग सूं रंगीलो अर सुरीलो बणायो है इणी भांत रो अेक गीत 'राणाजी' है - Folk songs hold significant importance and possess a distinctive identity within Rajasthan. Crafted with the sole intention of resonating with the masses, these melodies have transformed Rajasthan into a vibrant and melodious state. Among them, the song "Ranaji" stands as a testament to this rich tradition, awaiting your appreciation. #anjasmahotsav #Anjas #AnjasMahotsav Facebook: https://www.facebook.com/anjasrajasthani Instagram: https://www.instagram.com/anjasrajasthani/ Twitter: https://twitter.com/anjasrajasthani Literature Website: https://anjas.org/ Festival Website: https://anjasmahotsav.org/ ___________________________________________________________________________________अंजस कांई? अंजस राजस्थान री कला, साहित्य अर संस्कृति रो कोस है जिणमें सामिल है— कविता, कथा, कहाणी, बातां, ख्यातां अर लोक रो फूटरापौ। आ खेचळ रेख्ता फाउंडेशन कीन्ही है। अंजस रा अंग अबार इण खेचळ रा कैई न्यारा-न्यारा अंग है: जूनौ कोस: 13वीं सदी सूं ले’र 19वीं सदी रै लिखित साहित्य रो कोस। नूवौ कोस: सन् 1900 सूं आज तांई री लिख्योड़ै साहित्य रो कोस। वाचिक परंपरावां रो कोस जिण मांय सामिल रैसी लोक कथा, लोक गीत, औखाणा, संस्मरण इत्याद। अंजस महोत्सव: राजस्थानी भासा अर साहित्य रो वार्षिकोत्सव। भविख री बाट अंजस राजस्थानी भासा रो सगळा सूं लूंठो कोस बण’र त्यार होवैला अेड़ी आसा है। ओ कोस राजस्थानी पाठक वर्ग नै पूरै रूप सूं बिन्या कोई पैसां रै सब जिग्यां उपलब्ध रैवैला। आ खेचळ कितरी सारथक होवै इण बात री साख तो राजस्थानी रो आखौ पाठक वर्ग तै करेला, पण आपरी सिमरधता रै साथै जारी राजस्थानी रो पैलो उपक्रम है।
भगवान री भगती करतां थकां आत्मा नै दुबारा परमात्मा सूं मिलाणै खातर संतां योग साधना, उपासना, श्रद्धा अर प्रेम आद रो सहारो लियौ। अे संत परमात्मा नै निराकार, अजन्मी, अविनासी अर हरमेस रैवण वाळी मानी। इण कारण उण रो रूप आकार किण भांत हुवै ? बा अजर अमर है तो उण रो जलम किण भांत हो सकै ? बीं नै पावण खातर सगळा बारै रा उपाय बेकार है बो मन अर वाणी रो विसय कोनी बो इन्दि्रयातीत है इण भांत रो अेक भजन ‘मोको कहां ढूंढे रे बंदे में तो तेरे पास रे’ जिण नै ख्यातनांव कलाकार ‘मीर मुखत्यार’ जी आपरी आवाज दिन्ही है, सुणो ओ मीठो भजन To progress on the path of devotion, saints relied on yoga, worship, devotion, and love. They perceived God as formless, unborn, indestructible, and infinite—beyond all physical attributes. This bhajan, 'Moko kahan dhundhein re bande, main to tere paas re,' beautifully encapsulates this sentiment, sung by the renowned artist Mir Mukhtyar. Listen to this divine hymn. #AnjasMahotsav Facebook: https://www.facebook.com/anjasrajasthani Instagram: https://www.instagram.com/anjasrajasthani/ Twitter: https://twitter.com/anjasrajasthani Literature Website: https://anjas.org/ Festival Website: https://anjasmahotsav.org/ ___________________________________________________________________________________अंजस कांई? अंजस राजस्थान री कला, साहित्य अर संस्कृति रो कोस है जिणमें सामिल है— कविता, कथा, कहाणी, बातां, ख्यातां अर लोक रो फूटरापौ। आ खेचळ रेख्ता फाउंडेशन कीन्ही है। अंजस रा अंग अबार इण खेचळ रा कैई न्यारा-न्यारा अंग है: जूनौ कोस: 13वीं सदी सूं ले’र 19वीं सदी रै लिखित साहित्य रो कोस। नूवौ कोस: सन् 1900 सूं आज तांई री लिख्योड़ै साहित्य रो कोस। वाचिक परंपरावां रो कोस जिण मांय सामिल रैसी लोक कथा, लोक गीत, औखाणा, संस्मरण इत्याद। अंजस महोत्सव: राजस्थानी भासा अर साहित्य रो वार्षिकोत्सव। भविख री बाट अंजस राजस्थानी भासा रो सगळा सूं लूंठो कोस बण’र त्यार होवैला अेड़ी आसा है। ओ कोस राजस्थानी पाठक वर्ग नै पूरै रूप सूं बिन्या कोई पैसां रै सब जिग्यां उपलब्ध रैवैला। आ खेचळ कितरी सारथक होवै इण बात री साख तो राजस्थानी रो आखौ पाठक वर्ग तै करेला, पण आपरी सिमरधता रै साथै जारी राजस्थानी रो पैलो उपक्रम है।