गांधी गयो गमाय, अरथ तणी आंधी उठी।

सांपरतै है साच, झूठ जाण्यां ‘जेस जी’॥

स्रोत
  • पोथी : बानगी ,
  • सिरजक : मोहन आलोक ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै