घर सूं गळी

गळी सूं गांव

गांव सूं ठाह नीं कठै-कठै

भंवै भाई

सिंझ्या

उण सूं पैली पूगै

गांव रा ओळमा

समूळो घर

ऊभो दीखै भाई साथै

भाई रै कूड़ माथै

न्हांखै धूड़

ओळमा बूरता!

म्है हांसी ही गळी में

फगत अेक दिन

बांदर-बांदरी रो

खेल देखतां

बीं पछै

बंद है

म्हारै घर री

बाखळ रो बारणो

अणमणा है

घर रा सगळा

उण दिन रै पछै!

स्रोत
  • पोथी : मंडाण ,
  • सिरजक : अंकिता पुरोहित ,
  • संपादक : नीरज दइया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ,
  • संस्करण : Prtham
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